भगवान शिव को समर्पित श्रावण मास, हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। यह आमतौर पर जुलाई-अगस्त के दौरान पड़ता है, जो साधना, शुद्धि और भक्ति के लिए शक्तिशाली आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर आता है। इस दौरान, भक्त रुद्राभिषेक, उपवास, मंत्र जाप करते हैं और स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के लिए शिव मंदिरों में जाकर आशीर्वाद लेते हैं। ऐसा माना जाता है कि श्रावण के दौरान होने वाले कंपन भौतिक इच्छाओं से विरक्ति, मन की शुद्धि और दिव्य ऊर्जाओं के साथ गहरे संबंध को बढ़ावा देते हैं।
श्रावण मास में क्या न खाएं:
- मांसाहारी भोजन (मांस, मछली, अंडे)।
- शराब।
- प्याज और लहसुन (सात्विकता बनाए रखने के लिए)।
- बैंगन।
- पत्तेदार सब्ज़ियाँ (मानसून के कीड़ों के कारण)।
- अधिक खट्टे खाद्य पदार्थ (इमली, अचार, अधिक दही)।
- भारी, मसालेदार, तैलीय खाद्य पदार्थ।
- सोमवार को अनाज (यदि श्रावण सोमवार का व्रत कर रहे हैं)।
ये अभ्यास आपके शरीर और मन को आध्यात्मिक अभ्यास के लिए तैयार करते हैं, मानसून के दौरान पाचन में सुधार करते हैं, और श्रावण में उपलब्ध उच्च ऊर्जाओं को अवशोषित करने के लिए सात्विक गुणों को बढ़ाते हैं।
